तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर | Tum Gyan Vibhav Phooli Basant, Yah Man Madhukar

तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर

तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर

दिन बड़े भये बैराग भाव, मिथ्यातम रजनीको घटाव॥तुम. ॥१॥

बहु फूली फैली सुरुचि बेलि, ज्ञाताजन समता संग केलि॥तुम. ॥२॥

‘द्यानत’ वानी पिक मधुररूप, सुर नर पशु आनँदघन सुरूप॥तुम. ॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २९

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