धन्य मुनीश्वर निज आतम में मग्न रहें, हाँ मग्न रहें | dhanya munishvara nija atama mem magna rahem ha n magna rahem

तर्ज : वीरनाथ का मंगल शासन…

धन्य मुनीश्वर निज आतम में मग्न रहें, हाँ मग्न रहें ॥ टेक ॥
अन्तर्दृष्टि का बल वर्ते, घोर परीषह सहज सहें ।
उपसर्गों में क्षोभ न किंचित्, शांत रहें मुनि सौम्य रहें ॥ 1 ॥

अहो ! अतीन्द्रिय ज्ञानानंदमय, परम निस्पृही संत रहें।
स्वयं स्वयं में पूर्ण सदा ही, अनुभवते कृतकृत्य रहें ॥ 2 ॥

निज रस से ही तृप्त यतीश्वर, निर्वांछक निर्ग्रन्थ रहें।
अप्रभावित पर परिणति से मुनि, धीर-वीर गम्भीर रहें ॥ ३॥

कोलाहल से दूर मुनीश्वर, केवल जाननहार रहें।
आत्मध्यान धरि कर्म नशावें, तिन चरणन हम शीश धरें ॥ 4 ॥

मुनिवर दर्शित निज शुद्धातम, सतत सहज अनुभवन करें।
तोरि सकल जग द्वन्द-फन्द निज परमातम पद प्राप्त करें ॥ 5॥


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ १८४ से १८५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’