दरश करत मन मोहे मूरतियाँ | Darash Karat Man Mohe Muratiya

दरश करत मन मोहे मूरतियाँ

दरश करत मन मोहे मूरतियाँ

राग विभाव मिटावे मूरतियाँ… ।टेक ।।
वीतराग की प्यारी छवियाँ, मार्ग दिखावें मोक्ष सुपथियाँ,
यह संसार असार समझ ले, ऐसा भाव जगायें मूरतियाँ ।।1।।

श्री जिनवर की छवि है न्यारी, वन्दे सुर नर में बलिहारी,
पुण्योदय से दर्शन पायो, मन का राग मिटावे मूरतियाँ ।।2।।

अजर, अमर, दो शिवपुरवासी, जगत् शिरोमणी ज्ञान प्रकाशी,
दास भी ध्यावें निशिदिन तुमको, निज पर भेद बतावे मूरतियाँ ।।3।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ १४३ से १४४