तर्जः परम दिगम्बर…
धन्य हुए प्रभु दर्शन करके,
तेरी वाणी सुनेंगे हम।
तेरे पथ पर चलेंगे हम ।। टेक ।।
रूप आपका हमें सुहाया,
तत्त्व आपका मन को भाया।
भेद-विज्ञान करेंगे हम,
अन्तर्दृष्टि धरेंगे हम ।। 1।।
कर पर कर की रीति सुहायी,
कायोत्सर्ग दशा अति भायी।
कर्तृत्व बुद्धि तजेंगे हम,
ज्ञाता भाव सजेंगे हम ।। 2।।
निर्ग्रन्थ रूप अलौकिक देखा,
पर भावों का जहाँ न लेखा।
ममता मूर्च्छा तजेंगे हम,
समता भाव धरेंगे हम ।। 3।।
भायेंगे नित चित्स्वभाव को,
ध्यायेंगे हम परम भाव को।
कर्म विभाव तजेंगे हम,
प्रभुता रूप भजेंगे हम।। 4।।
आप रहो आदर्श जिनेश्वर,
हम पाया अपना परमेश्वर।
अपने में ही रमेंगे हम,
मुक्तिरमा को वरेंगे हम।। 5।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ८४ से ८५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’