दर्शन को उमावो म्हारे लागि रह्यो
(राग सारंग)
दर्शन को उमावो म्हारे लागि रह्यो ॥ टेर ॥
निशि बासर मेरे ध्यान तिहारो,
चरणन सों चित पाग रह्यो ॥ १ ॥
जब तैं मूरति नैना निरखी,
तब तैं पातिक भाग रह्यो ॥ २ ॥
जगत राम प्रभु गुण सुमरण तैं,
निज गुण अनुभव जाग रह्यो ॥ ३ ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ४३ (विभिन्न कवियों के भजन)