तू क्या उम्र की शाख पर सो रहा है
तू क्या उम्र की शाख पर सो रहा है।
खबर भी है तुझको कि क्या हो रहा है॥१॥
कतरते हैं चूहे इसे रात दिन दो।
कि जिस पर भी तू बेखबर सो रहा है॥२॥
न्यामत यह टहनी गिरा चाहती है।
विषय बूंद पर अपनी जां खो रहा है॥३॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ५९ (विभिन्न कवियों के भजन)