देखा मैंने त्रिशला को लाल | dekha maimne trishala ko lala

देखा मैंने त्रिशला को लाल सोने के पलने में।

सोने के पलने में, मणियों के पलने में । ॥देखा.. ॥
मैया तेरे ललना की अजब की बात ।
सुन्दर ज्ञानी मुखड़ा तीर्थंकर जैसे हाथ ॥ देखा… ॥टेक ॥
एक अर्ध रात्रि को
हाँ जी।
मैया ने देखे
हाँ जी।
उन सपनों का फल
हाँ जी।
क्या होगा जग में
हाँ जी।
एक बालक होगा
हाँ जी।
दीनों का पालक
हाँ जी।
देखा मैंने त्रिशला का लाल सोने के पहले में, सोने के पलने में… ॥1 ॥

फिर वो क्या होगा
हाँ जी।
एक केवल धारक
हाँ जी।
मैया का लाला
हाँ जी।
सबका रखवाला
हाँ जी।
जो भी देखेगा
हाँ जी।
हो जाये मतवाला
हाँ जी।
देखा मैंने त्रिशला का लाल सोने के पलने में, सोने के पलने में… ॥2॥

कुंडलपुर वासी
हाँ जी।
वो चरम शरीरी
हाँ जी।
इस नश्वर जग को
हाँ जी।
छोड़ेगा एक दिन
हाँ जी।
निधि की तैयारी
हाँ जी।
महलों के अन्दर
हाँ जी।
देखा मैंने त्रिशला का लाल सोने के पलने में, सोने के पलने में… ॥3॥


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०१५), पृष्ठ १२० से १२२