तुम देखे दरश सुख | Tum Dekhe Darash Sukh

तुम देखे दरश सुख,

तुम देखे दरश सुख पाए नयना ।।टेक।।

तुम जग ताता तुम जग माता, तुम वन्दन से भव भय ना ।।1।।

तुम गृह तीर्थंकर प्रभु आये, तुम देखे सोलह सपना ।।2।।

तुम भव त्यागी मन वैरागी, सम्यक्दृष्टि शुचि वयना ।।3।।

तुम सुत अनुपम ज्ञान विराजे, तीन ज्ञान सुजना ।।4।।

तुम सुत राज्य करें सुरनर पे, नीति निपुण दु:ख उद्धरना ।।5।।

तुम सुत साधु होय वन विहरें, तप साधें करमन हरना ।।6।।

तुम सुत केवलज्ञान प्रकाशे, जग मिथ्यातम सब हरना ।।7।।

तुम सुत धर्म तत्त्व सब भाषे, भविक अनेक भव से तरना ।।8।।

कर्मबन्ध हर शिवपुर पहुँचे, फिर कबहूँ नहिं अवतरना ।।9।।

हम सब आज जनमफल मानो, गर्भोत्सव कर अघ दहना ।।10।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ४५