तुमसे लगनी लागी मुनिवर, तुमसे लगनी लागी | tumase lagani lagi munivara tumase lagani lagi

तुमसे लगनी लागी मुनिवर, तुमसे लगनी लागी।

कुन्दकुन्द आचार्य शिरोमणि, तुमसे लगनी लागी ।। टेक ।।

कुन्दकुन्द स्मरण मात्र से, उर में हो उजियारा,
गुरो ! आपके ही प्रसाद से पाया, निज पद प्यारा।
शुद्धातम दर्शाया गुरुवर, तुमसे लगनी लागी।। 1।।

सीमंधर प्रभु के दर्शन को, आप विदेह पधारे,
भेंट हुई प्रभु समवशरण में, भक्ति भाव उर धारे।
ऐसी अविकारी भक्ति हो, मुनिवर लगनी लागी ।। 2 ।।

सुनी अपूर्व दिव्यध्वनि प्रभु की, सार अलौकिक लाये,
समयसार से शास्त्र बनाये, भविजन मन हर्षाये।
मुक्तिमार्ग बताया मुनिवर, तुमसे लगनी लागी।। 3।।

असीम शक्तिधर आतम ज्ञानी, चारण ऋद्धिधारी,
लब्ध प्रतिष्ठित शील शिरोमणि ज्ञानी बहुश्रुतधारी।
कुन्द्रादिगिरि से हुयी समाधि, मुनिवर लगनी लागी ।। 4 ।।

हुआ आपके ही चरणों से, दक्षिण देश सु पावन,
श्री कुन्दाद्रि तीर्थ कहलाये, भव्यों को मन भावन।
हो प्रतिबुद्ध भव्यजन गुरुवर, तुमसे लगनी लागी ।। 5 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २४५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’