देखो आतम देव महान्।
नित्यानंदमय, परमानंदमय, सहज चतुष्टयवान । ।टेक ।।
रागादिक दोषों से न्यारा, केवल देखन जाननहारा।
अकृत्रिम भगवान्।।देखो. ।।1।।
अक्षय वैभव शाश्वत प्रभुता, जिसकी नहीं जगत् में समता ।
है अनुपम अम्लान ।।देखो. ।।2।।
जिसको जाने बिन भव भ्रमता, जो जाने वह निज में रमता।
करे स्व-पर कल्याण ।।देखो. ।।3।।
जिसको ध्याते हैं योगीश्वर, बने स्वयं ही वे परमेश्वर।
पूजें सकल जहान।।देखो. ।।4।।
तीन लोक में यही सार है, समयसार है नियमसार है।
स्वयंसिद्ध गुण खान।।देखो. ।।5।।
हम भी पहिचानें शुद्धातम, भावें ध्यावें निज परमातम।
प्रगटे पद निर्वाण।।देखो. ।।6।।
स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’