ध्याओ निज शुद्ध स्वरूप समय है जाता | Dhyao Nij Suddh Svarup Samay Hai Jat

तर्ज : तुम जपो मंत्र …

ध्याओ निज शुद्ध स्वरूप समय है जाता।

ऐसा अवसर नहीं बार-बार है आता।टेक।।

उत्तम श्रावक कुल, मंद उदय कर्मों का।
मिलता सम्यक् उपदेश तुझे भी भाता।।1।।

अब भेदज्ञान के बिना व्यर्थ नहीं खोओ।
अवसर चूके मूरख पीछे पछताता।।2।।

परलक्षी इन्द्रिय ज्ञान का नहीं ठिकाना।
जो करे स्वानुभव ज्ञान वही सुख पाता।।3।।

दुर्मोह तजो सम्यग्दर्शन प्रगटाओ ।
सम्यग्दर्शन बिन नहीं भव भ्रमण मिटाता।।4।।

भोगों में फंसकर मूढ़ बने दुःख पाते।
धनि जीव इन्हें तज जो संयम अपनाता । ।5 ।।
निर्ग्रन्थ दशा ही एक मात्र सुखकारी।
निर्ग्रन्थ साधु ही कर्म काट शिव पाता।।6।।

हो धन्य घड़ी निर्ग्रन्थ दशा प्रगटाए।
रम जाऊँ निज में भाव यही उमड़ाता ।।7।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’