तू ही मेरा साहिब सच्चा सांई
तू ही मेरा साहिब सच्चा सांई
काल अनन्त रुल्यो जगमाहीं, आपद बहुविधि पाईं॥ तू ही. ॥ १ ॥
तुम राजा हम परजा तेरे, कीजिये न्याव न काईं ॥ तू ही. ॥ २ ॥
‘द्यानत’ तेरा करमनि घेरा, लेहु छुड़ाय गुसाईं ॥ तू ही. ॥ ३ ॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ७७