तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय | Tero Sanjam Bin Re, Narbhav Nirfal Jaay

तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय

तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय

बरष मास दिन पहर महूरत, कीजे मन वच काय॥तेरो. ॥१॥

सुरग नरक पशु गतिमें नाहीं, कर आलस छिटकाय॥तेरो.॥२॥

‘द्यानत’ जा बिन कबहुँ न सीझैं, राजबिर्षे जिनराय॥तेरो.॥३॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ९७

खोज: Tero Sanjam Bin Re, Narbhav Nirfal Jay

अर्थ

तू मन, वचन, काय से सदा अर्थात् प्रति समय, वर्ष, माह, दिन, प्रहर व मुहूर्त इसका (संयम का) पालन कर, इसको धारण कर।

तू देव, नारकी व तिर्यंच पर्याय में भी आलस छोड़कर संयम का पालन कर। द्यानतरायजी कहते हैं - जिनराज भी इस संयम के अभाव में सिद्ध नहीं हुए थे।

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ, पद 243।

:paperclip: मूल पृष्ठ (छवि):

प्रूफरीडिंग बाकी है