तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय
तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय
बरष मास दिन पहर महूरत, कीजे मन वच काय॥तेरो. ॥१॥
सुरग नरक पशु गतिमें नाहीं, कर आलस छिटकाय॥तेरो.॥२॥
‘द्यानत’ जा बिन कबहुँ न सीझैं, राजबिर्षे जिनराय॥तेरो.॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ९७
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