तेरी शीतल शीतल मूरत
तेरी शीतल-शीतल मूरत लख,
कहीं भी नजर ना जमें, प्रभू शीतल ।
सूरत को निहारें पल पल तब,
छबि दूजी नजर ना जमें ।।प्रभू शीतल।।
भव दुःख दाह सही है घोर, कर्म बली पर चला न जोर
तुम मुख चन्द्र निहार मिली अब,
परम शान्ति सुख शीतल ढोर ।
निज पर का ज्ञान जगे घट में भव बंधन भीड़ थमें ।।प्रभू।।
सकल ज्ञेय के ज्ञायक हो, एक तुम्ही जग नायक हो
वीतराग सर्वज्ञ प्रभू तुम,
निज स्वरूप शिवदायक हो ।
‘सौभाग्य’ सफल हो नर जीवन, गति पंचम धाम धमे ।।प्रभू।।
स्रोत: जैन भजन पूजा पाठ, पृष्ठ ४९