तहां लै चल री! जहां जादौपति प्यारो | Tahan Lai Chal Ri Jahan Jadaupati Pyaro

तहां लै चल री! जहां जादौपति प्यारो

तहां लै चल री! जहां जादौपति प्यारो ।।टेक।।

नेमि निशाकर बिन यह चन्दा, तन मन दहत सकल री ।।
किरन किधौं नाविक-शर-तति कै, ज्यों पावक की झलरी ।
तारे हैं अंगारे सजनी, रजनी राकसदल री ।।१।।

इह विधि राजुल राजकुमारी, विरह तपी वेकल री ।
‘भूधर’ धन्न शिवासुत बादर, बरसायो समजल री ।।२।।


Artist: पं. श्री भूधरदास जी
स्रोत: भूधर भजन सौरभ, पृष्ठ १६