तेरी छत्र छाया भगवन मेरे सिर पर हो।
मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे दर पर हो ॥
जिनवाणी सा पान करूँ मैं-2 जिनवर को ध्याऊँ।
आर्य जनों की संगति पाऊँ-2 व्रत संयम पालूँ।
गुणी जनाों के सद्गुण गाऊँ जिनवर यह वर दो ॥
मेरा अंतिम मरण… ॥1 ॥
पर निंदा मुँह से न निकले -2, मधुर वचन बोलूँ,
हृदय तराजू परहितकारी-2, सम्भाषक तोलूँ ।
आत्म तत्त्व की रहे भावन भाव विमल भर दो ॥
मेरा अंतिम मरण… ॥2 ॥
जिनशासन में प्रीति बढ़ाऊँ -2, मिथ्या पथ छोडूँ,
निष्कलंक चैतन्य भावना – 2, जिनमत से जोडूँ।
जन्म-जन्म में जैनधर्म यह मिल कृपा कर दो ॥
मेरा अंतिम मरण… ॥3 ॥
मरण समय गुरु पाद मूल हो - 2, संत समूह रहे,
जिनवर के आलय मंदिर में – 2, गंगा नित्य बहे।
भव-भव में संन्यास मरण हो नाथ हाथ भर दो ॥
मेरा अंतिम मरण…॥4॥
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २६२ से २६३