दौड़ा चेतन चार गति | Doda chetan chaar gati me

आत्मा हमारा हुआ है क्यों काला, राग से है मैला हुआ है झमेला।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन चार गति में दौड़ा।।टेक।।

राग करोगे- नहीं नहीं। द्वेष करोगे- नहीं नहीं।।
पूजा करोगे- हाँ हाँ। भक्ति करोगे- हाँ हाँ।।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन मुक्तिपुरी में दौड़ा।।१।।

मनुष्य गति में पहुँचा, दुनिया को जब देखा।
मान में गंवाया जीवन, भटक गयी फिर नौका।।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन मनुष्य गति में दौड़ा।
मान करोगे- नहीं नहीं घमण्ड करोगे-नहीं नहीं।।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन मुक्तिपुरी में दौड़ा।।२।।

नरक गति में पहुंचा, द:खों को जब देखा।
क्रोध की जलती ज्वाला थी स्व को फिर से भूला।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन नरक गति में दौड़ा।।
क्रोध करोगे - नहीं नहीं, गुस्सा करोगे - नहीं नहीं।।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन मुक्तिपुरी में दौड़ा।।३।।

तिर्यञ्च गति में पहुंचा, वहाँ भी खुद को भूला।
माया में गंवाया जीवन, भटक गई फिर नौका।।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन तिर्यञ्चगति में दौड़ा।
माया करोगे- नहीं नहीं। हिंसा करोगे- नहीं नहीं।।
दौड़ा-दौड़ा-दौड़ा चेतन मुक्तिपुरी में दौड़ा।।४।।

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