धन्य धन्य आतम स्वभाव तिहूँ जग से न्यारा | Dhany Dhany Atam Svabhav Tihu Jag Se Nyar

तर्ज : धन्य-धन्य वीतराग वाणी…

धन्य धन्य आतम स्वभाव तिहूँ जग से न्यारा।
संयोग देह कर्म मन वाणी, रागादि ते भिन्न-चेतन निशानी ।
ज्ञानरूप सुखकारा ।। 1 ।।

दर्शन-ज्ञान-चरित्र आदि भेद, होते हुये भी चेतन अभेद ।
एकरूप अविकारा।।2।।

निज स्वभाव पहिचान बिना ही, भटक रहा चहुंगति के माँहीं।
आतम ही एक आधारा ।।३।।

आतम ही देव गुरू निश्चय भाई, मुक्ति के पथ में आतम ही सहाई ।
आतम ही तीर्थ है प्यारा।।4।।

जो कोई ध्यावे परम सुख पावे, दुःखमय कर्मबन्ध क्षण में नशावे।
पावे भवोदधि किनारा।।5।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’