तेरी भगति बिना धिक है जीवना
तेरी भगति बिना धिक है जीवना
जैसे बेगारी दरजीको, पर घर कपड़ोंका सीवना ॥ तेरी. ॥ १ ॥
मुकुट बिना अम्बर सब पहिरे, जैसे भोजनमें घीव ना ॥ तेरी. ॥ २ ॥
‘द्यानत’ भूप बिना सब सेना, जैसे मंदिरकी नींव ना ॥ तेरी. ॥ ३ ॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ७८
खोज: Teri Bhagati Bina Dhik Hai Jivana
अर्थ
हे प्रभु। तेरी भक्ति के बिना यह जीवन जीना व्यर्थ है, निरर्थक है, तिरस्कार योग्य है।
जैसे बेगारी दरजीको, पर घर कपड़ोंका सीवना ॥ तेरी. ॥ १ ॥
जैसे दरजी सारा दिन अन्य जनों के घरों के कपड़ों की सिलाई करता है, परन्तु उसे उन कपड़ों को पहनने का सुख नहीं मिलता। उसकी बेगार/श्रम व्यर्थ हो जाता है। उसी प्रकार तेरी भक्ति के बिना शेष सब कार्य वेगार ही हैं, अतः तेरी भक्ति के बिना यह जीवन जीना निरर्थक है, व्यर्थ है।
मुकट बिना अम्बर सब पहिरे, जैसे भोजनमें घीव ना ॥ तेरी. ॥ २ ॥
जैसे कपड़े तो सब पहन लिए, पर सिर पर मुकुट नहीं है, सिर पर कुछ नहीं है तो पोशाक अधूरी-सी रहती है। जैसे बिना स्निग्धता के, बिना चिकनाई के भोजन-नीरस-सूखा लगता है। वैसे ही तेरी भक्ति के बिना जीवन सूखा होता है, नीरस होता है, व्यर्थ होता है।
‘द्यानत’ भूप बिना सब सेना, जैसे मंदिरकी नीव ना ।। तेरी. ।। ३ ॥
द्यानतराय कहते हैं कि जैसे राजा के बिना सेना का होना निरर्थक है, नींव के बिना मन्दिर का बनाना निरर्थक है, वैसे ही तेरी भक्ति के बिना यह जीवन निरर्थक है, व्यर्थ है।
स्रोत: द्यानत भजन सौरभ।
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