जो होगा देखा जायेगा | Jo hoga dekha jayega

लेखक:- पंडित संजीव जैन
संगीत:- सरस्वती स्टूडियो
संगीत निर्माता:- अरुण विर
स्वर :- पंडित संजीव जैन
सहयोगी स्वर :- शिखा राणा

दृष्टि पर से हटा बैठे जो होगा देखा जायेगा।
स्वयं की शरण में आ बैठे जो होगा देखा जायेगा।।

कैसे होगें ये जग के काम, यूं ही डर-डर के जीते थे।
गरल मिथ्यात्व का अमृत समझ, हंस - हंस के पीते थे(2)।।1।।
अकर्ता आज बन बैठे
जो होगा..

लगा था पुण्य का ही रस, उसी में व्यस्त रहते थे।
उसी में व्यस्त रहते थे, उसी में मस्त रहते थे।।2।।
अरस का रस लगा बैठे- जो होगा…

करी इच्छायें सब पूरी, अन्त इनका नहीं आया।
एक अणु भी नहीं छूता, भोग में जो नहीं आया।।2।।
अभोक्ता में समा बैठे- जो होगा…

रही पर्याय में अब तक, मूढ़ता जीव की भारी।
कहाया परसमय जाना ना, वो अपना भाव त्रैकाली।।2।।
ध्रौव्य की धुन लगा बैठे, जो होगा…