तुम्हीं हो ज्ञाता, द्रष्टा तुम्हीं हो | Tumhi Ho Gyata Drashta Tumhi Ho

तर्ज : तुम्हीं हो माता, पिता तुम्हीं हो

तुम्हीं हो ज्ञाता, द्रष्टा तुम्हीं हो, तुम्हीं जगोत्तम, शरण तुम्हीं हो ।। टेक ।।

तुम्हीं हो ज्ञाता …
तुम्हीं हो त्यागी, तुम्हीं वैरागी, तुम्हीं हो धर्मी, सर्वज्ञ स्वामी,
हो कर्म जेता, तीरथ प्रणेता, तुम्हीं जगोत्तम, शरण तुम्हीं हो ।। 1 ।।
तुम्हीं हो ज्ञाता …
तुम्हीं हो निश्चल, निष्काम भगवन, निर्दोष तुम हो, हे विश्वभूषण,
तुम्हें त्रिविध है वन्दन हमारी, तुम्हीं जगोत्तम, शरण तुम्हीं हो ।। 2 ।।
तुम्हीं हो ज्ञाता …
तुम्हीं सकल हो, तुम्हीं निकल हो, तुम्हीं हजारों हो नामधारी,
कोई ना तुमसा हितोपकारी, तुम्हीं जगोत्तम, शरण तुम्हीं हो ।। 3 ।।
तुम्हीं हो ज्ञाता …
जो तीर सके ना भव सिन्धु माँही, किया क्षणों में है पार तुमने,
बैरी है पावन मुक्तिरमा को, तुम्हीं जगोत्तम, शरण तुम्हीं हो ।। 4 ।।
तुम्हीं हो ज्ञाता …
जो ज्ञान निर्मल है नाथ तुममें, वही प्रकट हो वीरत्व हममें,
मिले परमपद सौभाग्य हमको, तुम्हीं जगोत्तम, शरण तुम्हीं हो ।। 5 ।।
तुम्हीं हो ज्ञाता …
आदरणीय छोटे दादा की कलम से…!

भोट की स्वर्णिम छठा सम क्षणिक सब संयोग है ।
पद्मपत्रों पर पड़े जलबिन्दु सम सब भोग हैं ।।
सान्ध्य दिनकर लालिमा सम लालिमा है भाल की ।
सब पर पड़ी मनहूस छाया विकट काल कराल की ।।


स्रोत: जिनवर भक्ति शतक (सामूहिक जिनेन्द्र पूजन समिति, कोटा)
संकलन: विक्रान्त कुमार जैन · सम्पादन: डॉ. वैद्य दीपक जैन
स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ ४९