तू ही शुद्ध है | tu hi shuddha hai

तू ही शुद्ध है, तू ही बुद्ध है, तू ही गुण अनंत की खान है

सुन चेतना अब जागना ॥ टेक ॥
कोई कर्म तुझको छुआ नहीं, तुझे कुछ भी तो हुआ नहीं-2
तू ही ज्ञेय, ज्ञाता ज्ञान है, अंतर में तू भगवान है
सुन चेतना अब जागना… ।।1 ।।

निःकलंक है निष्काम है, निर्वेद है निर्विकार है-2
निर्दोष है, निष्पाप है, निर्लोभ निराकार है
सुन चेतना अब जागना… ।।2 ।।

मेरे ज्ञान में सब ज्ञान है, तू सूर्य रश्मि खान है
उपयोग में उपयोग है, तू बन रहा अन्जान है
सुन चेतना अब जागना… ।।3 ।।

तेरी आत्मा ध्रुव सिद्ध जो, परमात्मा से कम नहीं-2
तू एक ज्ञायक भाव बस, परिपूर्ण प्रभुतावान है
सुन चेतना अब जागना… ।।4 ।।


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन