नैना मोरे दर्शन कूं उमगे
(सोरठ)
नैना मोरे दर्शन कूं उमगे ॥टेक॥
परम शांति रस भीनी मूरत
हिय मैं हर्ष जगे ॥१॥
नमन करत ही अतिसुख उपजै
सब दुःख जात भगे ॥२॥
नवल पुन्य तैं जोग मिल्यो है
चरणन आन लगे ॥३॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ८७ (विभिन्न कवियों के भजन)