देखे जिनराज आज, राजऋद्धि पाई
देखे जिनराज आज, राजऋद्धि पाई ॥टेक॥
पहुपवृष्टि महा इष्ट, देवदुंदुभी सुभिष्ट,
शोक करै भृष्ट सो, अशोकतरु बड़ाई ॥
देखे जिनराज आज, राजऋद्धि पाई ॥१॥
सिंहासन झलमलात, तीन छत्र चित सुहात,
चमर फरहरात मनो, भगति अति बढ़ाई ॥
देखे जिनराज आज, राजऋद्धि पाई ॥२॥
‘द्यानत’ भामण्डल में, दीसैं परजाय सात,
बानी तिहुँकाल झरै, सुरशिवसुखदाई ॥
देखे जिनराज आज, राजऋद्धि पाई ॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)
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