Namokaar mantr l नमोकारमंत्र

नमोकारमंत्र - माहात्म्य की ढाल

श्रीगुरु शिक्षा देत हैं, सुनि प्रानी रे !
सुमर मंत्र नौकार, सीख सुनि प्रानी रे!
लोकोत्तम मंगल महा, सुनि प्रानी रे!
अशरन-जन-आधार, सीख सुनि प्रानी रे! ॥ १ ॥

प्राकृत रूप अनादि है, सुनि प्रानी रे!
मित अच्छर पैंतीस, सीख सुनि प्रानी रे!
पाप जाय सब जापतैं, सुनि प्रानी रे!
भाष्यो गणधर ईश, सीख सुनि प्रानी रे! ॥ २ ॥

मन पवित्र करि मंत्रको, सुनि प्रानी रे!
सुमरै शंका छोरि, सीख सुनि प्रानी रे!
वांछित वर पावै सही, सुनि प्रानी रे!
शीलवंत नर नारि, सीख सुनि प्रानी रे! ॥ ३।।

विषधर-वाघ न भय करै, सुनि प्रानी रे!
विनसैं विघन अनेक, सीख सुनि प्रानी रे!
व्याधि विषम-विंतर भजैं, सुनि प्रानी रे!
विपत न व्यापै एक, सीख सुनि प्रानी रे ! ॥ ४ ॥

कपिको शिखरसमेदपै, सुनि प्रानी रे!
मंत्र दियो मुनिराज, सीख सुनि प्रानी रे!
होय अमर नर शिव वस्यो, सुनि प्रानी रे !
धरि चौथी परजाय, सीख सुनि प्रानी रे! ॥ ५॥

कह्यो पदमरुचि सेठने, सुनि प्रानी रे!
सुन्यो वैलके जीव, सीख सुनि प्रानी रे!
नर सुखके सुख भुंजकै, सुनि प्रानी रे!
भयो राव सुग्रीव, सीख सुनि प्रानी रे! ॥६॥

दीनों मंत्र सुलोचना, सुनि प्रानी रे!
विंध्यश्रीको जोड़, सीख सुनि प्रानी रे!
गंगादेवी अवतरी, सुनि प्रानी रे!
सर्प-डसी थी सोई, सीख सुनि प्राणी रे ! ॥ ७ ॥

चारुदत्तपै वनिकने, सुनि प्रानी रे!
पायो कूपमँझार, सीख सुनि प्रानी रे!
पर्वत ऊपर छागने सुनि प्रानी रे!
भये जुगम सुर सार, सीख सुनि प्रानी रे! l। ८ ॥

नाग नागिनी जलत हैं, सुनि प्रानी रं !
देखे पासजिनिंद सीख सुनि प्रानी रे!
मंत्र देत तब ही भये, सुनि प्रानी रे !
पदमावति धरनेंद्र, सीख सुनि प्रानी रे! ॥ १ ।।

चहले में हथिनी फंसी, सुनि प्रानी रे!
खग कीनों उपगार, सीख सुनि प्रानी रे!
भव लहिकै सीता भई, सुनि प्रानी रे!
परम सती संसार, सीख सुनि प्रानी रे ! ।। १० ॥

जल मांगै शूली चढ्यो, सुनि प्रानी रे!
चोर कंठ-गत-प्रान, सीख सुनि प्रानी रे !
मंत्र सिखायो सेठने, सुनि प्रानी रे!
लह्यो सुरग सुख-थान, सीख सुनि प्रानी रे! ll११ ॥

चंपापुरमें ग्वालिया, सुनि प्रानी रे!
घोखै मंत्र महान, सीख सुनि प्रानी रे!
सेठ सुदर्शन अवतर्यो, सुनि प्रानी रे!
पहले भव निरवान, सीख सुनि प्रानी रे! ॥१२॥

मंत्र महातमकी कथा, सुनि प्रानी रे !
नामसूचना एह, सीख सुनि प्रानी रे!
श्रीपुन्यासरवग्रंथ में, सुनि प्रानी रे!
तारे सो सुनि लेहु, सीख सुनि प्रानी रे! ॥ १३॥

सात-विसन सेवन हठी, सुनि प्रानी रे!
अधम अंजना चोर, सीख सुनि प्रानी रे!
सरधा करते मंत्रकी, सुनि प्रानी रे!
सीझी विद्या जोर, सीख सुनि प्रानी रे ! ।।१४।।

जीवक सेठ समोधियो, सुनि प्रानी रे!
पापाचारी स्वान, सीख सुनि प्रानी रे!
मंत्र प्रतापैं पाइयो, सुनि प्रानी रे!
सुंदर सुरग विमान, सीख सुनि प्रानी रे! ॥१५॥

आगैं, सीझे सीझि है, सुनि प्रानी रे!
अब सीझै निरधार, सीख सुनि प्रानी रे!
तिनके नाम बखानतैं, सुनि प्रानी रे!
कोई न पावै पार, सीख सुनि प्रानी रे! ॥ १६॥

बैठत चिंतै सोवतै, सुनि प्रानी रे!
आदि अंतलौं धीर, सीख सुनि प्रानी रे!
इस अपराजित मंत्रको, सुनि प्रानी रे!
मति विसरै हो वीर, सीख सुनि प्रानी रे! ।। १७॥

सकल लोक सब काल में, सुनि प्राणी रे !
सरवागममें सार, सीख सुनि प्रानी रे!
‘भूधर’ कबहुं न भूलि है, सुनि प्राणी रे!
मंत्रराज मन धार, सीख सुनि प्रानी रे ! ॥ १८॥

भूधर भजन सौरभ

2 Likes