तुम सुनियो श्रीजिननाथ, अरज इक मेरी जी | Tum Suniyo Shrijinanath Araj Ik Meri Ji

तुम सुनियो श्रीजिननाथ, अरज इक मेरी जी

तुम सुनियो श्रीजिननाथ, अरज इक मेरी जी ।।टेक।।

तुम बिन हेत जगत् उपकारी, वसुकर्मन मोहि कियो दुखारी,
ज्ञानादिक निधि हरी हमारी, द्यावौ सो मम फेरी जी ।।१।।

मैं निज भूल तिनहि संग लाग्यो, तिन कृत करन विषय रस पाग्यौ,
तातैं जन्म-जरा दव-दाग्यौ, कर समता सम नेरी जी ।।२।।

वे अनेक प्रभु मैं जु अकेला, चहुँगति विपतिमांहि मोहि पेला,
भाग जगे तुमसौं भयो भेला, तुम हो न्यायनिवेरी जी ।।३।।

तुम दयाल बेहाल हमारो, जगतपाल निज विरद समारो,
ढील न कीजे बेग निवारो, ‘दौलतनी’ भवफेरी जी ।।४।।


Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ ३३