देखो सिद्धचक्र का पाठ, जगत् में मंगलकारी है | Dekho Siddhacakr Ka Path Jagat Mem Mamgalakari Hai

तर्ज : देखो जिनस्वरूप सुखकार…

देखो सिद्धचक्र का पाठ, जगत् में मंगलकारी है।

मंगलकारी है, जगत् में आनंदकारी है।।टेक।।

स्वयंसिद्ध परमात्मा, चित्स्वरूप अविकार।
धन्य भाग्य पूजन रची, आनंद अपरम्पार।।1।।

नित्य निरंजन ध्येय प्रभु, समयसार अम्लान।
ध्येय रूप के ध्यान से, सहज होय निर्वाण।।2।।

भेदज्ञान वर्ते प्रभु, सहज रूप वैराग।
निज स्वरूप की प्राप्ति हो, पर भावों का त्याग।।3।।

धनि धनि ज्ञानानंदमय, शुद्धातम भगवान्।
समय समय ध्याऊँ अहो, ध्रुव स्वरूप सुख खान।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ २७५