थांकी शान्ति छवि मन बसगई जी नहीं रुचे और छवि नैनन में
थांकी शान्ति छवि मन बसगई जी नहीं रुचे और छवि नैनन में ।टेर ॥
निर्विकार निर्ग्रंथ दिगम्बर देखत कुमति विनशगईजी ॥१॥
चिर मिथ्यातम दूर करन को चन्द्रकला सी दरश रहीजी ॥२॥
‘मानिक’ मन मयूर हरषन को मेघ घटासी दरश रहीजी ॥३॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २ (विभिन्न कवियों के भजन)