नैना क्यों नहिं खोलै, गति गति डोलैरे अज्ञानी
(राग ख्याल तमाशा व गजल)
नैना क्यों नहिं खोलै, गति गति डोलैरे अज्ञानी।
चेतो क्यों नहिं ज्ञानी, तूतो करता अपनी हानी ॥टेर॥
नरभव पाया, सुथल में जाया, सुकुल में आया।
सुना कर जिनवानी, तजदे तू आनाकानी
तेरीमति भई बोरानी ॥१॥
विषयों से भाग, कषायों को त्याग, शुभ पथ लाग।
चली यह जिंदगानी ज्यों अंजुलि झरता पानी,
तू करता है क्यों मनमानी ॥२॥
संयम धार काम को मार, अनुभव सार ।
जग में सब जानी तू बनजा ज्ञानी ध्यानी,
‘नानू’ उत्तम सीख सयानी ॥३॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन १९ (विभिन्न कवियों के भजन)