देखो ज्ञानमयी मुनिराज | Dekho Jnanamayi Muniraj

देखो ज्ञानमयी मुनिराज । ।टेक ।।

सहज निरम्बर, रहित अडम्बर, पर सौं कछू न काज।
सुगुण करण्ड, परम वैभवमय, ज्ञानमयी साम्राज्य ।।1।।

नहीं कुछ चिन्ता, नहीं कुछ वांछा, सहज तृप्त ऋषिराज ।
ध्यानमग्न शोभें मुनि अविचल, सेवे भव्य समाज।।2।।

मूर्तिमान मुक्ति का मारग, तारण तरण जहाज।
दर्शावें रागादि शून्य, ज्ञानानंदमय जीवराज ।।3।।

धन्य-धन्य निर्ग्रन्थ निस्पृही, तीन भुवन सिरताज।
सहज नमन परमार्थ स्तवन, होय सहज अविकार ।।4।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’
स्रोत: जिन-भक्ति सिंधु, पृष्ठ २२२ से २२३