नेमि गये रे गिरनार हो… ओ…²
ऐ नेमि गये रे गिरनार… ओ… भैया, राजुल को छोड़ गए…
नेमि गये रे गिरनार, पानी छमा छम बरसे² छमा-छम…²
नेमि कुंवर दुल्हा बन आए, छप्पन कोटि बराती आए।
अरे राजुल को² तज दिया आज… पानी… ।।
पशुओं के क्रन्दन को सुनकर,
जग की स्वारथ वृत्ति देखकर। दीक्षा धर ली आज… पानी… ।।
समुद्र विजय अचरज में भारी, पुत्र विवाह की है तैयारी।
जाऐगें-² अब गिरनार… पानी… ।।
शोक बहुत राजुल के मन में, किन्तु लगाया चित्त संयम में।
दीक्षा में-² रंग गई आज… पानी… ।।
राजुल को बाबुल समझावे, बेटी दूजा ब्याह रचावे²।
अरे राजुल भी-² चढ़ी गिरनार, पानी छमाछम बरसे ।।