नर भव को सफल बनाओ (कवि राजमल पवैया) | Nar Bhav Ko Saphal Banao (Rajmal Pavaiya)

नर भव को सफल बनाओ

तुम करो आत्म कल्याण, धरो निज ध्यान,
मोक्ष में जाओ । नर भव को सफल बनाओ ।।
मिथ्यात्व अंधेरा छाया है, रागों ने सदा रूलाया है ।
अज्ञान तिमिर को हरो, ज्ञान प्रगटाओ ।।
नर भव को सफल बनाओ ।।१।।

पर्याय मूढता में पडकर, रहते विभाव में ही अड़ कर ।
अब द्रव्य दृष्टि बन,निज का दर्शन पाओ ।।
नर भव को सफल बनाओ ।।२।।

सातों तत्वों का ज्ञान करो, अपने स्वभाव का मान करो ।
अब सम्यक् दर्शन, निज अंतर में लाओ ।।
नर भव को सफल बनाओ ।।३।।

लो भेद ज्ञान का अवलम्बन, है मुक्ति वधू का आमंत्रण ।
शिव पुर में जाकर, अविनश्वर सुख पायो । ।
नर भव को सफल बनाओ ।।४।।


Artist: कवि राजमल जी पवैया
स्रोत: जैन पूजांजलि (श्री रूपचन्द्र सुशीलाबाई दि. जैन ग्रंथमाला, विदिशा, १९९२), प्रारम्भिक भजन