दयालु प्रभु से दया मांगते हैं
दयालु प्रभु से दया मांगते हैं
अपने दुःखों की दवा मांगते हैं ॥टेक॥
नही हमसा कोई, अधम् चोर पापी ,
सत् कर्म हमने न, किये हैं कदापि ।
किये नाथ हमने यह अपराध भारी,
उनकी हृदय से हम क्षमां मांगते हैं ॥दयालु…१॥
दुनियां के भोगों की ना कुछ चाहना,
स्वर्ग के सुखों की भी ना कुछ कामना ।
मिले सत् संयम करें आत्म चिन्तन ,
वरदान भगवन् ये सदा मांगते हैं ॥दयालु…२॥
प्रभु तेरी भक्ति में, मन ये मगन हो ।
निजातम के चिन्तन कि हरदम लगन हो,
यहीं एक आशा है बन जाऊँ तुम सा,
सेवक नहीं और कुछ मांगते हैं ॥दयालु…३॥
स्रोत: nikkyjain.github.io (देव भजन)
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