नमों मैं नमों मैं नमों जैनवाणी | Namo Main Namo Main Namo Jainvaani

नमों मैं नमों मैं नमों जैनवाणी,
हमें ज्ञान कैवल्य दो जैनवाणी ॥ टेक ॥।

सदा वास कीनो गति चार ही में,
बिना तुम कृपा के रहा त्रास ही में ।
कहों मात तोसों कहा लों कहानी,
हमें ज्ञान कैवल्य दो जैनवाणी ॥1॥

महामोह विध्वंसनी खड्ग धारा,
विषय वाटिका नासिवे कूं तुषारा ।
त्रिधा रोग की औषधी तू महानी,
हमें ज्ञान कैवल्य दो जैनवाणी ॥2॥

समाधान रूपा अनूपा निहारी,
अनेकान्त स्याद्वाद मुद्रा तिहारी ।
तुम्हीं सप्तधा द्वादशांगी बखानी,
हमें ज्ञान कैवल्य दो जैनवाणी ॥3॥

सदा ध्यान तेरो धरें लोग जेजे,
करें पाद पूजा भली भाँति जेजे ।
मिले तासु को मोक्ष की राजधानी,
हमें ज्ञान कैवल्य दो जैनवाणी ॥4॥

तिहुँ लोक में एक नौका मिली है,
भली भांति भवदधि तारन तुही है।
सुधाधर्म धारा पिलाती है वाणी,
हमें ज्ञान कैवल्य दो जैनवाणी ॥15॥