थारो मुख चन्द्रमा देखत भ्रम तम भाग्यो, हेजी महाराज | Tharo Mukh Chandrama Dekhat Bhram Tam Bhagyo, Heji Maharaj

थारो मुख चन्द्रमा देखत भ्रम तम भाग्यो, हेजी महाराज

(राग कालंगडा)

थारो मुख चन्द्रमा देखत भ्रम तम भाग्यो, हेजी महाराज ॥टेर ॥

पाप ताप मिटि शान्ति भाव होय, चेतन निजरस पाग्यो ॥१॥

चित चकोर थिरता अब पाई, आनन्दरस सब लाग्यो ॥२॥

नैन छिनक अन्तर नहिं चाहत, शिवमग लालच लाग्यो ॥३॥


स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २७ (विभिन्न कवियों के भजन)