थारा तो भला की जिया याही जान
(सोरठ)
थारा तो भला की जिया याही जान ॥टेर ॥
कर श्रद्धान जिनेसुर वाणी, समकित हिरदय आन ॥ १ ॥
तज कषाय त्याग परिग्रह, कर्म रिपुन को भान ।
जगतराम शुभ गति पावन को, जग में येही पिछान ॥ २ ॥
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन ८ (विभिन्न कवियों के भजन)
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