तर्ज : ऐसे मुनिवर देखे वन में …
देखो-देखो श्री जिनवर को, देखो-देखो श्री प्रभुवर को।। टेक ।।
आसन अचल सु नासादृष्टि, देखो कर पर कर को ।। 1 ।।
भूषण रहित जगत् के भूषण, अनन्त चतुष्टय-धर को ।।2।।
गणधर इन्द्रादिक चरणन नत, इन सम देव अवर को ।। 3 ।।
भाव सहित नित प्रभु को ध्यावें, तरें सु तारें पर को ।। 4 ।।
स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ ८५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’