देखे धन्य घरी, आज पावापुर महावीर । Dekhe Dhanya Ghari Aaj Pavapur Mahaveer

देखे धन्य घरी, आज पावापुर महावीर ॥ टेक ॥
गौतमस्वामि चंदना मेंढ़क , श्रेणिकसुखकर धीर ॥ देखे. ॥ १ ॥
चार ओर भवि कमल विराजैं, भक्ति फूल सुख नीर ॥ देखे. ॥ २।।
‘द्यानत’ तीरथनायक ध्यावै, मिट जावै भव भीर ॥ देखे. ॥ ३ ॥

सोर्स: द्यानत भजन सौरभ
रचयिता: पंडित श्री द्यानतराय जी

खोज: Dekhe Dhanya Ghari Aj Pavapur Mahavir

अर्थ

आज पांवापुर में महावीर की निर्वाणस्थली पर प्रभु के दर्शन किए। यह घड़ी, यह समय, अत्यन्त शुभ है, धन्य है। वे महावीर गौतम गणधर, चंदना, मेंढक और श्रेणिक आदि को सुखकारी हैं, संतोष प्रदान करनेवाले हैं।

चारों ओर सुखदायक जल में किल सुन्दर फाग में भी पुष्प खिले हैं, जिनके बीच में प्रभु विराजित हैं।

द्यानतराय कहते हैं कि ऐसे तीर्थ के नायक भगवान महावीर को जो ध्याता है, जो उनका स्तवन व सुमिरण करता है उसके भव-भव के कष्ट नष्ट हो जाते हैं।

स्रोत: द्यानत भजन सौरभ।

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