आज पांवापुर में महावीर की निर्वाणस्थली पर प्रभु के दर्शन किए। यह घड़ी, यह समय, अत्यन्त शुभ है, धन्य है। वे महावीर गौतम गणधर, चंदना, मेंढक और श्रेणिक आदि को सुखकारी हैं, संतोष प्रदान करनेवाले हैं।
चारों ओर सुखदायक जल में किल सुन्दर फाग में भी पुष्प खिले हैं, जिनके बीच में प्रभु विराजित हैं।
द्यानतराय कहते हैं कि ऐसे तीर्थ के नायक भगवान महावीर को जो ध्याता है, जो उनका स्तवन व सुमिरण करता है उसके भव-भव के कष्ट नष्ट हो जाते हैं।