तुम चेतन हो
तुम चेतन हो …
जिन विषयनि सँग दुख पावै सो, क्यों तज देत न हो॥तुम. ॥१॥
नरक निगोद कषाय भ्रमावै, क्यों न सचेतन हो॥तुम. ॥२॥
‘द्यानत’ आपमें आपको जानो, परसों हेत न हो॥तुम. ॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: आध्यात्मिक भजन संग्रह (सं. श्री सौभाग्यमल जैन, पं. टोडरमल स्मारक ट्रस्ट, जयपुर, २००६), भजन २८