तू काहेको करत रति तनमें, यह अहितमूल जिम कारासदन | Tu Kaheko Karat Rati Tanamen Yah Ahitamul Jim Karasadan

तू काहेको करत रति तनमें, यह अहितमूल जिम कारासदन

तू काहेको करत रति तनमें, यह अहितमूल जिम कारासदन ।।टेक।।

चरमपिहित पलरुधिरलिप्त मल, - द्वार स्रवै छिन छिन में ।।१।।

आयु-निगड फंसि विपति भरै, सो क्यों न चितारत मनमें ।।२।।

सुचरन लाग त्याग अब याको, जो न भ्रमै भववनमें ।।३।।

‘दौल’ देहसों नेह देहको, - हेतु कह्यौ ग्रन्थनमें ।।४।।


Artist: कविवर श्री दौलत राम जी
स्रोत: दौलत भजन सौरभ, पृष्ठ १७५