तुम प्रभु कहियत दीनदयाल
तुम प्रभु कहियत दीनदयाल ॥टेक॥
आपन आय मुकतमैं बैठे, हम जु रुलत जगजाल ॥
तुमरो नाम जपैं हम नीके, मन वच तीनौं काल ।
तुम तो हमको कछू देत नहिं, हमसे कौन हवाल ॥
आपन आय मुकतमैं बैठे, हम जु रुलत जगजाल ॥
तुम प्रभु कहियत दीनदयाल ॥१॥
बुरे भले हम भगत-तिहारे, जानत हो हम बाल ।
और कछू नहिं यह चाहत हैं, राग दोषकौं टाल ॥
आपन आय मुकतमैं बैठे, हम जु रुलत जगजाल ॥
तुम प्रभु कहियत दीनदयाल ॥२॥
हमसौं चूक परी सो बकसो, तुम तो कृपाविशाल ।
‘द्यानत’ एक बार प्रभु जगते, हमको लेहु निकाल ॥
आपन आय मुकतमैं बैठे, हम जु रुलत जगजाल ॥
तुम प्रभु कहियत दीनदयाल ॥३॥
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)
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