नाथ तुम्हारी भक्ति में सब | natha tumhari bhakti mem saba

नाथ तुम्हारी भक्ति में सब, स्वाहा करने आया।

तुम जैसा बनने के कारण, शरण तुम्हारी आया ॥ टेक ॥

पंचेन्द्रिय का लक्ष्य करूँ मैं, इस अग्नि में स्वाहा।

इन्द्र नरेन्द्रों के वैभव की, चाह करूँ मैं स्वाहा।

तेरी साक्षी से अनुपम मैं यज्ञ रचाने आया ॥1 ॥

जग की मान प्रतिष्ठा को भी, करना मुझको स्वाहा।

नहीं मूल्य इस मन्द भाव का, व्रत तप आदि स्वाहा।

वीतराग के पथ पर चलने का प्रण लेकर आया ॥2॥

अरे जगत् के अपशब्दों को, करना मुझको स्वाहा।।

पर लक्षी सब ही वृत्ति को, करना मुझको स्वाहा।

अक्षय निरंकुश पद पाने और पुण्य लुटाने आया ॥3 ॥


स्रोत: मङ्गल भक्ति सुमन (२०२४), पृष्ठ २८ से २९