तू जाग रे चेतन देव तुझे जिनदेव | Tu Jag Re Chetan Dev Tujhe Jinadev

तू जाग रे चेतन देव तुझे जिनदेव

तू जाग रे चेतन देव तुझे जिनदेव जगाते हैं
तेरे अंदर में आनन्द के गीत तुझे संगीत न भाते हैं ।।
परपद अपद है, परपद अपद है तुझको न शोभा देता
अपने ही रंग में, अपनी ही धुन में रम जा तू संतों ने घेरा
तेरी महिमा अगम अनूप, तुझे जिनदेव जगाते हैं ।।

इस पल भी जीना, निज बल पे जीना, शोभावे सन्मुख ही जीना
दो दिन का मेला फ़िर तू अकेला कोई है जग का कहीं ना
सुन समयसार संगीत तुझे जिनदेव सुनाते हैं ।।
चैतन्य रस में, आनन्द के रस में, शान्ति के रस में नहाले
प्रभुता के रस में, भीरुता के रस में, वैराग्य रस में मजा ले
फ़िर सब गावें तेरे गीत, तुझे जिनदेव जगाते हैं ।।


स्रोत: जैन भजन पूजा पाठ, पृष्ठ २५२