दियैं दान महा सुख पावै
दियैं दान महा सुख पावै
कूप नीर सम घर धन जानौं, कढ़ैं बढ़ैं अकढ़ैं सड़ जावै।।१ ।।
मिथ्याती पशु दानभावफल, भोग-भूमि सुरवास बसावै।।२ ।।
`द्यानत’ गास अरध चौथाई, मन-वांछित विधि कब बनि आवै।।३ ।।
Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: jainkosh.org
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