देखो भाई ! ज्ञानानन्दमय आतम | Dekho Bhai Jnananandamay Atam

देखो भाई ! ज्ञानानन्दमय आतम।

ज्ञानानन्दमय सहजानन्दमय, परमानंदमय आतम।। टेक ।।

रागादिक दोषों से न्यारा, ज्ञानमात्र अविकारी।
शक्ति अनंत उछलती जिसमें, शाश्वत मंगलकारी ।। देखो… ।।1।।

जिसका दर्शन सम्यग्दर्शन और अनुभवन ज्ञान।
जिसमें हो एकाग्रलीन थिर वही है चारित्रवान ।। देखो… ।।2।।

जिसके आश्रय से ही नशते, सहजहिं सर्व विभाव ।
शाश्वत अक्षय प्रभुता प्रगटे, प्रगटे क्षायिक भाव ।। देखो… ।।३।।

देव-शास्त्र-गुरू परम उपकारी, शुद्धातम दर्शाया।
धन्य-धन्य आसन्न भगवान्, जिनके मन को भाया।। देखो… ।।4।।

धन्य दिवस हो धन्य घड़ी हो, सकल प्रपंच निवारें
हो निर्ग्रन्थ निजातम ध्याऊँ, परमानन्द विस्तारूँ ।। देखो… ।।5।।

हो प्रभावना मंगलकारी, सभी निजातम पावें।
अनेकान्तमय जैनधर्म की, मंगल ध्वज फहरावें ।। देखो… ।।6।।


स्रोत: भक्ति-भावना (द्वितीय खण्ड)
Artist: श्री ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’
स्रोत: डॉ. विनोद ‘चिन्मय’