णमोकार जप थारो काँई बिगड़े | Namokar Jap Tharo Kai Bigde

तर्ज : धीरे धीरे बोल कोई सुन ना ले

णमोकार जप थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े,
णमोकार जप थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े ।
अरे आनन्द सूँ बोल थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े,
णमोकार सा मन्त्र नहीं, सर्व दुःखों का अन्त यही ।
णमोकार जप थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े ।। टेक ।।

अरे आनन्द सूँ बोल थारो काँई बिगड़े …

अरहंतों के दर्शन ही सुखकार हैं, चार घाती कर्मों के वो क्षयकार हैं - 2,
हम जान लें, और मान लें,
मन्दिर में पत्थर नहीं, इस काल में अरहन्त यही ।
णमोकार जप थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े ।।1।।
अरे आनन्द सूँ बोल थारो काँई बिगड़े …
सब सिद्धों का ध्यान हम लगायेंगें, उनके पथ चल स्वयं सिद्ध बन जायेंगे - 2,
मैं शुद्ध हूँ, और बुद्ध हूँ,
गुण मुझमें कोई कम नहीं, गुण सिद्धों सम मुझमें अभी ।
णमोकार जप थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े ।। 2 ।।
अरे आनन्द सूँ बोल थारो काँई बिगड़े …
मुनिवर ये कहते हैं बारम्बार, तप संयम ही जीवन का आधार - 2,
होगा पतन, यह मानव तन,
कब से की थी मैनें अनसुनी, अब मैं भी बन जाऊँ मुनि ।
णमोकार जप थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े ।। ३ ।।
अरे आनन्द सूँ बोल थारो काँई बिगड़े …
जिनवाणी की महिमा अपरम्पार है, इस मानुष पर्याय की ये पतवार है - 2,
जिनवचन का, अनुसरण कर,
गुरुदेव की है बात यही, जिनवाणी सम मात नहीं ।
णमोकार जप थारो काँई बिगड़े, काँई बिगड़े थारो काँई बिगड़े ।। 4 ।।
अरे आनन्द सूँ बोल थारो काँई बिगड़े …

क०क०क०क०क०卐०क०क०क०क०क

घ. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’ की कलम से…!
पाया कहे सो बावरा, खोया कहे सो झूट ।
पाया खोया है नहीं, ज्यों का त्यों भरपूर ॥


स्रोत: जिनवर भक्ति शतक (सामूहिक जिनेन्द्र पूजन समिति, कोटा)
संकलन: विक्रान्त कुमार जैन · सम्पादन: डॉ. वैद्य दीपक जैन

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