तेरैं मोह नहीं | Terain Moh Nahin

तेरैं मोह नहीं

तेरैं मोह नहीं ।
चक्री पूत सुगुनघर बेटो, कामदेव सुत ही ॥टेक॥

नव भव नेह जानकै कीनौ, दानी श्रेयाँस ही ।
मात तात निहाचै शिवगामी, पहले सुत सब ही ॥१॥

विद्याधरके नृप कर कीनौं, साले गनधर ही ।
बेटीको गननी पद दीनों, आरजिका सब ही ॥2॥

पोता आप बराबर कीनों, महावीर तुम ही ।
‘द्यानत’ आपन जान करत हो, हम हूँ सेवक ही ॥3॥


Artist: पं. द्यानतराय जी
स्रोत: nikkyjain.github.io (पं द्यानतराय कृत भजन)

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