देखो सुखी सम्यक्वान | Dekho sukhi samyakvan

adhyatm
dyanatraiji

#1

देखो सुखी सम्यक्वान |
सुख - दुःख को दुखरूप विचारै, धारैं अनुभव ज्ञान || टेक ||

नरक सात में के दुःख भोगैं, इन्द्र लखैं तिन मान |
भीख मांग कै उदर भरैं न, करैं चक्री को ध्यान || १ ||

तीर्थंकर पद को नहिं चावें, जपि उदय अप्रमान |
कुष्ट आदि बहु व्याधि दहत न, चहत मकरध्वज थान || २ ||

आधि व्याधि निरबाध अनाकुल, चेतन जोति पुमान |
‘द्यानत’ मगन सदा तिहि माहीं, नाहीं खेद निदान || ३ ||

Artist- पं. द्यानतराय जी