धन्य दिवस यह आज का, धन्य घड़ी महाराज | dhanya divasa yaha aja ka dhanya gha di maharaja

धन्य दिवस यह आज का, धन्य घड़ी महाराज।

दर्शन पाकर आपका, जन्म सफल हुआ आज ।।
मन लागा हमारा मुनिवर में।

मन लागा आचार्य कुन्दकुन्द देव में ।। टेक ।।

दर्शन-ज्ञान-चारित्र से, प्रगटा साधक भाव।
चारित्र दशा आराधकर, साधा ज्ञायक भाव।। 1।।

सीमंधर प्रभु दिव्यध्वनि, सुनी महा सुखकार।
भव्यों प्रति करुणा करी, रचा समय का सार।। 2।।

शास्त्र रचे प्रभु अनोखे, पूरे अद्भुत भाव ।
चार संघ पर कृपा कर, खेई शासन नाव।। 3।।

पर्वत यह पावन किया, पावन पोन्नूर ग्राम।
हम सब भी पावन हुये, कुन्दकुन्द के धाम।। 4।।

धन्य भूमि धन्य धूलि यह, धन्य हमारा भाग्य।
संघ सहित दर्शन किये, हुयी सफल मम आस।। 5 ।।


स्रोत: जिन भक्ति सिंधु, पृष्ठ २४४ से २४५
Artist: ब्र. रवीन्द्रजी ‘आत्मन्’

खोज: धन्य दिवस यह आज का, धन्य घडी महाराज, धन्य दिवस यह आज का, धन्य घड़ी महाराज