क-वर्ग (क ख ग घ)
कुल 143 भजन
क (90)
- कंकड़-कंकड़ बन गया
- कब मुनिवर दर्शन पाऊँ, कब गुरुवर दर्शन पाऊँ
- कब मैं अलौकिक वृत्ति धरूँगा
- कब सहज दिगम्बर साधु
- कब सहज दिगम्बर साधु दशा मैं पाऊँ रे
- कब होगा आत्मदर्शन
- कब हौं मुनिवरको व्रत धरिहौं
- कबधौं मिलै मोहि श्रीगुरु
- कबधौं सर पर धर डोलेगा
- कबै निरग्रंथ स्वरूप धरूंगा
- कभी भूल नहीं जाना
- कभी वीर बनके, महावीर बनके
- कर कर आतमहित रे प्रानी
- कर मन ! निज-आतम-चिंतौन
- कर रे ! कर रे ! कर रे ! तू आतम हित
- कर ले प्रभु का ध्यान
- कर लो जिनवर का
- कर लो जिनवर का गुणगान
- कर सकल विभाव अभाव मिटादो बिकलपता मन की
- करता रहूँ गुणगान, मुझे दो
- करता हूँ तुम्हारा सुमिरन
- करता हूँ मैं अभिनन्दन
- करना मन ध्यान महामंत्र
- करले आतम ज्ञान परमातम
- करलो जिनवर की पूजन, आई पावन घड़ी
- करलो जिनवाणी अभ्यास, आई मंगल घड़ी
- करलो प्रभु गुणगान, करलो भेदविज्ञान
- करलों प्रभु गुण गान, अवसर आयो है
- करलो-करलो सम्यक् ज्ञान, जीवन थोड़ा रहा
- करुणा के भण्डार, हमारे महावीरा
- करुणा ल्यो जिनराज हमारी, करुणा ल्यो
- करुणा सागर भगवान्, भव पार
- करूँ भक्ति जिनराज, तिहुँ जग मंगलकारी
- करें भगत हो आरती
- करो कल्याण आतम का
- करो धर्म से प्यार अमृत बरसेगा
- करौ रे भाई तत्त्वारथ सरधान
- कर्त्ता तो नित मरता है
- कर्मनिको पेलै, ज्ञान दशामें खेलै
- कलि में ग्रन्थ बड़े उपगारी
- कल्पतरू से प्राप्त भोगों की न किंचित् चाह है
- कल्पद्रुम यह समवशरण है
- कल्याणमयी परमात्मा
- कहत सुगुरु करि सुहित भविकजन
- कहा मानले ओ मेरे भैया
- कहाँ चढ़ रहो माने शिखापैं, जासो सुर चक्री नहीं धापै
- कहाँ परदेशी को पतियारो
- कहिवे को मन सूरमा
- कहै राघौ सीता, चलतु गेह
- कहै सीताजी सुनो रामचन्द्र
- कहैं भरतजी सुन हो राम! राज भोगसों मोहि न काम
- काम मेरा है जानना
- काया गागरि, जोजरी, तुम देखो चतुर विचार हो
- कारज एक ब्रह्म ही सेती
- कारण परमात्मा, क्षण-क्षण भाऊँ सुखकार
- कारण समय, शाश्वत समयसार
- काल अचानक ही ले जायेगा
- कालिमा मत पोत रे, कालिमा मत पोत रे
- काहे पाप करे काहे छल
- काहेको सोचत अति भारी
- कितना प्यारा तेरा ये द्वारा
- कितना सुंदर तेरा द्वारा
- कितना सुन्दर
- किया अनन्त उपकार, मुनीश्वर किया अनन्त उपकार हो
- कींपर करो जी गुमान, थे तो कै दिनका मिजमान
- कीजे हो भाईयनिसों प्यार
- कुंथुनके प्रतिपाल कुंथ जग , - तार सारगुनधारक हैं
- कुंदकुंद-सा पारस छूकर
- कुण्डलपुर में वीर हैं जन्मे
- कुन्दकुन्द आचार्य कह गये, जो निज आतम ध्यायेगा
- कुमता के संग जाय चेतन बरज्यो नहीं मानत मानी
- कुमति कुनारि नहीं है भली रे, सुमति नारि सुन्दर गुनवाली
- केवलिकन्ये, वाङ्गमय गंगे
- केसरिया केसरिया
- कैसा ध्यान धरा है जोगी
- कैसा सुंदर है ये जैन शासन महा
- कैसी सुन्दर जिन प्रतिमा
- कैसे करें गुणगान प्रभु जी
- कैसे ध्यानमग्न नेमिनाथ भगवान्, पाया है अक्षय पद निर्वाण
- कैसो सुंदर अवसर आयो है
- कोई इत आओ जी
- कोई कैसे ये कह दे
- कोई न रोकनहार मुक्ति मारग में, स्वानुभूति है द्वार, मुक्ति मारग में
- कोई महिमा है अद्भुत नाथ, कैसे वचन से कहूँ
- कोई राजमहल में रोये, कोई परनकुटी में सोये
- कौन काम अब मैंने कीनों, लीनों सुर अवतार हो
- क्या तन मांजना रे
- क्या-क्या कहूँ निज वैभव की, निज वैभव है अनुपम जग में
- क्यूं करे अभिमान जीवन
- क्रोध है दुःखमय, निज क्षमा शान्तिमय
ख (2)
ग (43)
- गंभीर गुरुता वाले हैं
- गगन मण्डल में उड़ जाऊँ
- गम्भीर गुरुता वाले हैं
- गरव नहिं कीजै रे, ऐ नर
- गर्भ कल्याणक की शुभ घड़ी आई
- गर्भ कल्याणक शुभ घड़ी
- गर्भ-कल्याणक आ गया
- गलता नमता कब आवैगा
- गहु सन्तोष सदा मन रे! जा सम और नहीं धन रे
- गा रे भैया, गा रे भैया
- गाओ-गाओ-गाओ, जिनवर के गुण गाओ
- गाओ-गाओ-गाओ जिनशासन की महिमा
- गागर अमृत की भर लाईं
- गाड़ी खड़ी रे खड़ी रे तैयार
- गाड़ी खड़ी रे खड़ी रे तैयार, चलो रे भाई शिवपुर को
- गाफिल हुवा कहाँ तू डोले, दिन जाते तेरे भरती में
- गावहु आज बधाई, बधाई, बधाई, बधाई
- गावो री बधाईयां
- गिरनारिपै नेमि विराजत हैं
- गिरनारी पर तप कल्याणक
- गिरिवनवासी मुनिराज
- गुण चिन्तत श्री मुनिवर के
- गुरु कहत सीख इमि बार बार
- गुरु ने पिलाया जो ज्ञान पियाला
- गुरु भक्ति- हम देखी प्रभा मुनिराज की
- गुरु रत्नत्रय के धारी
- गुरु वन्दना सप्तक
- गुरु वन्दनाष्टक
- गुरु समान दाता नहिं कोई
- गुरु समान दाता नहिं कोई
- गुरु स्तुति : ते गुरु मेरे मन बसो
- गुरु स्मरण
- गुरुओं के उपकार को हम
- गुरुदेव आए रे
- गुरुवर तुम ही शरण हमारे-2
- गुरुवर थारी परिणति अंतरमयी
- गुरुवर साँचे शरण हमारे, मिथ्या मोह निवारन हारे
- गूँजे जय जयकार, वीर जयवन्त रहो
- गूँजे जय-जयकार, गूँजे जय-जयकार
- गौतम स्वामीजी मोहि वानी तनक सुनाई
- ग्यान प्रधान लहा महावीर ने
- ग्यान बिना दुख पाया रे, भाई
- ग्रंथ समयसार हमें प्राणों से प्यारा